Holi kab hai 2023 { 2023 में होली कब है } , होली कितनी तारीख को है , होली क्यों मनाया जाता है, होलिका दहन का शुभ मुहूर्त कब है - Jankari web - जानकारी वेब

शनिवार, 26 मार्च 2022

Holi kab hai 2023 { 2023 में होली कब है } , होली कितनी तारीख को है , होली क्यों मनाया जाता है, होलिका दहन का शुभ मुहूर्त कब है

2023 mein holi kab hai - भारत जैसे देश में यहां Holi तैयार को बड़े धूमधाम से बनाया जाता है हर तरह के लोग इस त्यौहार का आनंद बड़ी धूमधाम से मनाते हैं क्या हिंदू (Hindu) क्या मुस्लिम ( Muslim) सभी इस त्यौहार का आनंद उठाते हैं होली ( Holi ) एक ऐसा त्यौहार ( Festival) है जिस के रंगों से कोई नहीं बच सकता , चाहे बच्चे हो यहाँ बूढ़े सभी Holi festival मे बहुत मजा करते है अगर आप साल 2023 में भी होली फेस्टिवल का आनंद उठाना चाहते हैं तो जानले की (Holi kab hai ) holi कब है , 2023 मे holi kitni tarikh ki hai, holi kaun si tarikh ki hai ,holi kab hai aur kis din hai और होली किस तारीख को आएगी.

जैसे की आपको पता होगा वर्ष 2020-2021 मे Corona के चलते रगो में Government की तरह से प्रतिबंध लगा लिया था पर इस बार ऐसा बिलकुल भी नहीं होगा क्यूंकि अगर आप अपनी safety के साथ होली त्यौहार ( Holi festival) का आनंद उठाना चाहते हैं तो उठा सकते हैं तो चाहिए जानते है.

Holi कब है 2023 में,Holi kab hai 2023 me | 2023 me Holi kab hai 


Holi एक पवित्र Festival है जिसे भारत के साथ Nepal देश भी Holi festival को अपनाता है पर 2023 में होली कब है ( Holi kab hai ) इस बारे में बहुत कम लोगों को पता है अगर आप जानना चाहते हैं Holi kab hai तो जाने Holi इस साल March के महीने में आने वाली है.

holi kitni tarikh ko hai,holi ka tyohar kab aata hai, होली किस तारीख को है? होली 2023 में मार्च महीने में शुक्रवार यानि की 7 March और 8 March को मनाई जानी है.

होली 2 दिन मनाने के पीछे बहुत बड़ा कारण है अगर आप जाना चाहते हैं कि इसके पीछे क्या कारण है तो इस post को पूरा जरूर पढ़ें

2023 मे 7 मार्च को पूरा भारत छोटी होली जाने की होलिका दहन और 8 मार्च को बड़ी होली का आनंद उठा सकते हैं.
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Holi क्या है और होली क्यों मनाई जाती है -


होली एक पवित्र तैयार है जिससे पूरी दुनिया में मनाया जाता है इस दिन को बहुत से लोग खुशियों के दिन के नाम से भी जानते हैं क्योंकि होली के बाद सर्दी कम हो जाती है और गर्मियों की शुरुआत हो जाती है और भी बहुत से काम होली के बाद शुरू हो जाते है.

भारत में सब तैयार की तुलना में सिर्फ होली ही एक ऐसा त्यौहार है जिसमें हंसी और खुशी का आनंद होता है भारत के साथ नेपाल में भी इस फेस्टिवल को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है|

रंगों के इस त्यौहार को भारत में 2 दिन मनाया जाता है पहले दिन छोटी होली के नाम से और दूसरे दिन बड़ी होली के नाम से, छोटी और बड़ी होली दोनों के पीछे अलग अलग मतलब होता है जैसे छोटी होली वाले दिन होलिका दहन और बड़ी होली वाले दिन एक दूसरे के साथ रंगों में गुम हो जाते हैं दोपहर तक होली का आनंद उठाने के बाद स्नान और विश्राम करने के बाद शाम को एक दूसरे के साथ फिर मिलते है और और खुशियां बांटते हैं यह है हमारा भारत यहां होली का आनंद इस तरह उठाया जाता है

होली क्यों मनाई जाती है| Holi kyu manage jaate hai -


Holi बनाने के पीछे भी बहुत बड़ा अर्थ और कहानियां इसके पीछे छुपी हैं अगर आप जानना चाहते हैं होली क्यों बनाई जाती है तो इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ें इस कहानी की शुरुआत कुछ समय पहले हुई जब भारत देश का एक राजा जिनका नाम हिरण्यकश्यप था

हिरण्यकश्यप ने अपनी प्रार्थना से भगवान विष्णु को प्रसन्न किया जिसके बदले में भगवान विष्णु ने हिरण्यकश्यप राजा को अमर होने का वरदान दिया जिसके बाद ही इस होली का पहला पड़ाव शुरू हुआ

हिरण्यकश्यप नाम का राजा जिसे वरदान मिलने के बाद कुछ समय बाद अपने ऊपर घमंड महसूस होने लगा कि वह मैं ही अब पूरे संसार का भगवान हूं और अपनी प्रजा को बताने लगा कि अब से मैं हिरण्यकश्यप आज से तुम्हारा भगवान हूं आप सभी मेरी पूजा करेंगे इस तरह का घमंड राजा को होने लगा|

राजा का वरदान मांगने का उद्देश्य बस इतना था कि वह अपने भाई की मौत का बदला लेना चाहता था दरअसल भगवान विष्णु ने हिरण्यकश्यप राजा के भाई का वध कर दिया था

राजा का एक बेटा भी था यो अपनी आराधना और प्रार्थना सिर्फ भगवान विष्णु की ही करता था यही कष्ट राजा नहीं चाहता था पर एक दिन राजा ने अपने बेटे को पूछा कि  पुत्र आप सबसे ज्यादा किस पर विश्वास करते हो आगे से बेटे का जवाब आया

 कि मैं सबसे ज्यादा भगवान विष्णु पर विश्वास करता हूं यह सुनते ही राजा को अधिक क्रोध आने लगा और राजा अपने बेटे को समझाने लगा कि अब से मैं तुम्हारा भगवान हूं तुम सिर्फ और सिर्फ मेरी पूजा करोगे यह कहते ही आगे से जवाब आता है कि पिताजी यह मैं नहीं कर सकता में सिर्फ भगवान विष्णु पर विश्वास करता हूं और उन्हीं की पूजा करूंगा


यह कहते ही राजा को और अधिक क्रोध आने लगा और राजा ने अपने बेटे के प्रति एक योजना बनाई जिसमें किस तरह से अपने बेटे को मृत्यु की ओर धकेला जाए राजा ने तरह-तरह के विचार अपनाएं जैसे कि जहरीले सांपों से कटवाना, हाथी के नीचे कुचलना ,पहाड़ से गिरा ना आदि 
सभी तरह के प्रयास करने के बाद भी राजा को सफलता हाथ नहीं आई.


फिर एक दिन राजा को एक और विचार मन में आया कि क्यों ना प्रजा के सामने मैं अपने पुत्र को जिंदा आग से जला   दू जिससे प्रजा डरकर मेरी पूजा करने लगे, ऐसा करने के लिए राजा ने अपनी पुत्री का सहारा लिया 

राजा हिरण्यकश्यप के बेटे और बेटी का नाम प्रहलाद और होलिका था 

होलिका के पास एक शौल थी जो उन्हें भगवान से वरदान मांगने पर मिली थी शौल का उपयोग करके होलिका कभी भी आग से नहीं जला सकती थी| इसी का फायदा उठाने के लिए राजा हिरण्यकश्यप ने इस षडयंत्र को रिचा और षडयंत्र के अनुसार प्रहलाद जो राजा का बेटा था उसे अपनी ही बहन की गोदी में बिठाकर जलती आग में बैठा दिया राजा को लगा कि होलिका को आग से किसी भी तरह का दृष्ट प्रभाव नहीं पड़ेगा पर असल में ऐसा बिल्कुल भी नहीं हुआ ऐसा क्यों नहीं हुआ जाने के लिए पोस्ट को थोड़ा और पढ़ें

क्योंकि होलिका को भगवान द्वारा वरदान दिया गया था की अगर तुम इस शौल को पहनकर आग में चलती हो, बैठती हो या कुछ भी करती हो तुम पर किसी भी तरह का आग का दृष्ट प्रभाव नहीं पड़ेगा राजा ने सभी प्रजा के सामने अपनी स्त्री और पुत्र दोनों को बैठा कर आग लगा दी ताकि प्रजा का कोई भी व्यक्ति राजा का अपमान ना करें

षडयंत्र अनुसार आग लगने के बाद गोद में बैठे प्रहलाद भगवान विष्णु से प्रार्थना करने लगा जिससे भगवान विष्णु राजा के बेटे से प्रसन्न हुए इसके बाद तेज हवा का तूफान आने लगा जिस कारण होलिका का शौल हवा के कारण उड़ गया होलीका आग में समा गई पर प्रहलाद भगवान विष्णु का भक्त था उस पर किसी भी तरह का आग की लपटों का असर नहीं पड़ा, और प्रहलाद सलामत आग से निकल गया पर उसकी बहन आग में समा गए इसी कारण बरसों से लेकर अभी तक माना जाता है की बुराई की हमेशा हार होती है और अच्छाई की हमेशा जीत.

इसीलिए होली त्यौहार मनाया जाता है होली से 1 दिन पहले होलिका दहन होता है जिस दिन बुराई के अंत के लिए होली जलाई जाती है और अगले दिन होली को बड़े धूमधाम से अपने मित्रों के साथ खेली जाती है और खुशियां बांटी जाती हैं|

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निष्कर्ष : holi कब है 2023 मे ? holi kaun si tarikh ki hai,2023 mein holi kab hai -


Holi festival को आप और मैं बड़े धूमधाम से अपने मित्रों ,फैमिली, रिलेटिव के साथ बड़े आनंद के साथ खेलते हैं colour और Water colours का भरपूर आनंद उठाते हैं पर जैसे कि आपको पता है कोबिट का समय चल रहा है तो इसलिए होली खेलने के साथ अपनी और अपने दोस्तों की सेफ्टी का भी ध्यान रखें


Holi kab hai , होली किस दिन है होली कौन से महीने में है सब इंफॉर्मेशन इस पोस्ट की मदद से हासिल कर ली है अगर फिर भी आपके मन में होली कब है ( Holi kab hai ) 2023 में , Holi March me kab hai, holi kitni tarikh ki hai  इससे संबंधित कोई भी सवाल हो तो मुझे कमेंट बॉक्स में अपना सवाल जरूर पूछें जिससे मैं जल्द से जल्द आपके पूछे गए सवाल का जवाब आप तक पहुंचा सकूं और अगर होली किस दिन है और होली किस तारीख को है पोस्ट पसंद आई होगी तो इससे शेयर जरूर करें अपने दोस्तों में तो यहां मैं अपना पोस्ट समाप्त करता हूं आपका पोस्ट पढ़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद!

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